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<title>چیزی شبیه خودم...</title>
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<lastBuildDate>Tue, 06 Oct 2009 23:55:18 GMT</lastBuildDate>
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<title>جستجو</title>
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<description> &lt;FONT size=5&gt;جستجو&lt;/FONT&gt; 
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;بگو درکدام مرز&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;پشت کدام سیم خاردار&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تیربارانت کرده اند؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;یا در کدام دریا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;خونت &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;شهوت کوسه&lt;/FONT&gt; &lt;FONT size=3&gt;ماهی هایش را &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تا مغز استخوان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;در جانت فرو برده است؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;بگو در کجا کشته اند تو را؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;برای یافتنت &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تمام روزنامه های جهان را جستجو کردم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تمام گورهای بی نام و نشان را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;آغوش روسپیان تمام میخانه های دور را.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;برای یافتن تو &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;که نگذاشتی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;وطنت بازوان برهنه ی من باشد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تاهر شام&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;در بیشه زارهای مرطوب من &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;به خواب بروی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;و هر صبح &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;با طلوع خورشید از میان سینه هایم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;چشم هایت را بازکنی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;FONT size=3&gt;بی آنکه بیم هیچ جنگی تو را از من بگیرد. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;ایستاده بودم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تا شلاقم بزنند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تکه تکه ام کنند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;و به جای تو &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;درگورهای بی نام و نشانه مدفونم کنند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;ایستاده بودم&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تا تو &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تنها تو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;بخواهی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;وطنت بازوان برهنه ی من باشد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;نخواستی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;و مشتی دروغ &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;همه ی آنچیزی بود که تحویلم&lt;/FONT&gt; &lt;FONT size=3&gt;دادند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;هرگز نیافتمت.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;پس از آن &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;این تن&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;زندان تاریک دیوانه ای شده است &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;که روزی هزار بار &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;درآن خود را به دار می آویزد &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;و نمی میرد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2009 23:55:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>badhayehamvare</dc:creator>
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</item>
<item>
<title></title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-33.aspx</link>
<description>&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt; 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#990000 size=5&gt;راستی سگ زرد یا شغال؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;در بوق و کرنا کردند که شرکت در انتخابات حرام است. راه به راه کابل را راکت باران &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;کردند. و حالا سر راه &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;مردم غریب را میگیرند که کلکت را نشان بده .اگر رنگ داشت &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تنبیه خواهی شد. &lt;FONT color=#990000&gt;( این از حکم طالبان)&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;و اما با همه ی این حرفها مردم  به پای صندوق های رای رفتند و به قول &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;منورالفکرهایمان مشق &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;دموکراسی کردند که مثلا بله دیگر ماهم بالاخره پدر و مادر دار &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;شدیم و کسی هست که برای خواسته &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;هایمان تره خرد کند.اما راستی این هیاهوی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;رنگارنگ تمرین دموکراسی بود برای ملت ؟ و اگر بود نتیجه &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;اش چه خواهد بود؟ چه &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;اتفاقی قرار است بیفتد که تا به حال نیفتاده و کدام شاهزاده ای بر کرسی &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;ریاست &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;تکیه خواهد زد که وضع و روز مردم را  بتواند به آن درجه از تباهی بکشاند که صاحب &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;کرسی قبلی &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;نتوانسته باشد تا امروز؟&lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;چه اتفاق تازه ای در راه است حقیقتا؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;آنهم در حالیکه همه ی داستان از قبل طراحی شده و رای ها از صندوق های &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;انتخاباتی نهایتا از آن کسی &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;خواهد بود که پشتش به از ما بهتران یعنی از ملت بهتران &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;با حرارت تمام گرم است .&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;در وطن ما همه چیز همانطور پیش می رود که اربابان دنیا تصمیمش را گرفته باشند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;و  تنها چیزی که &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt;رنجش در دل می ماند به بازی گرفته شدن آرزو های کوچک و&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;همیشه محال مردم بی نوایمان است&lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=3&gt; برای هزارمین بار. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 25 Aug 2009 16:41:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>badhayehamvare</dc:creator>
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</item>
<item>
<title></title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-32.aspx</link>
<description> &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#990000 size=3&gt;باز هم تابستان شد و دوره ی سفرهای ناشناخته . &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#990000 size=3&gt;این را برای این نوشتم که بگویم تا آمدن و نوشتن دوباره ای بدروود.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 20 Jun 2009 13:06:05 GMT</pubDate>
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<dc:creator>badhayehamvare</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>معاشقه</title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-31.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=4&gt;معاشقه&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;ملامتت نمی کنم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;برای سگهای لاغری &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;که هر شامگاه &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;گلویت را &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;به تلخی زوزه می کشند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;برای پرندگانی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;که سالهاست&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;به اشتباه حتی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;مسیرشان با شاخه هایت پیوند نخورده است&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;برای کرمهایی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;که در رگهای آماس کرده ات می لولند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;و خونهای گندیده را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;لخته &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;لخته&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;در خیابانهای متروکت استفراغ می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;گناه از تو نبود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;اگر که زمان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;از پیکرت قلمروی بی آب و علف ساخت&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;با دیوارهای کاهگلی کوتاه.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;به همین آسانی محبوبم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;گناه از من نیز نیست&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;اگر &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;زبان در کامت میگذارم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;وبوسه هایم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;طعم تگرگ های سرآسیمه ی اسفند ماه را دارند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;اگر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; نوازش انگشتانم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;سنگینی چکمه های سوارانی را دارد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;که برای کشتن تو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; تمام مرزهای تنت را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;زیر و رو خواهند کرد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;گناه از من نیز نیست محبوبم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 16 May 2009 08:23:18 GMT</pubDate>
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<item>
<title>اردیبهشت</title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-30.aspx</link>
<description>  
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اردیبهشت  ماه تولد ایمان و سنایم است. این سپید کوتاه را به سلامتی این ماه و سلامتی کودکانم میگذارم:&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#0000cc size=3&gt;بهار را دوست میدارم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#0000cc size=3&gt;برای  دو گنجشک کوچک اردیبهشت ماهش &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#0000cc size=3&gt;که بر شاخه هایم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#0000cc size=3&gt;                       پریدن گرفتند...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Fri, 24 Apr 2009 17:23:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>badhayehamvare</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>مجازات</title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-29.aspx</link>
<description>  
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#ff0000 size=4&gt;ببین تفاوت ره از کجاست تا به کجا !&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#0000cc&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اینطرف: رکسانا صابری &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اتهام : جاسوسی برای دولت امریکا&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;رای دادگاه : هشت سال زندان&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; آنطرف : پرویز کامبخش&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اتهام : گرفتن و انتشار محدود مقاله ای از اینترنت  بانام &quot; آیات زن ستیز در قران &quot;بین تعدادی دانشجو&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;رای دادگاه :تخفیف مجازات اعدام به بیست سال حبس&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;نتیجه اینکه :&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; یعنی هیچ کس نبود به این پرویز کامبخش بگوید: برای اندیشیدن هم باید عزیز دردانه ای چیزی بود ؟ و به او  بگوید آخر تو چه چیزی داشتی که به پشتوانه ی آن خواستی فکر کنی و سخن بگویی؟ مادرت ژاپنی بود که نبود ! پدرت آمریکایی آنهم از نوع ایرانی اش بود که نبود ! کسی که میخواهد کاری بکند باید مثل این رکسانا ی عزیز دردانه پشتش به جاهای خیلی خیلی محکم گرم باشد. زندانی شدن هم اینطوری اش میچسپد به خدا . تو در زندان باشی . رسانه های تمام دنیا روی تو و سلامتی تو زوم کرده باشد مبادا خدای ناکرده از بینی نازنین خون بیاید .تازه از این هم لذت بخش تر اینکه  سه دولت بزرگ هر ساعت برای تعیین سرنوشت تو به  همدیگر دندان نشان بدهند. رئیس جمهور امریکا شخصا برای صحت تو اظهار نگرانی کند . رئیس جمهور ایران دستور رسیدگی مجدد پرونده ات را بدهد در ضمن تاکید بر تامین شرایط مناسب برای آسودگی تو در زندان . و  دولت ژاپن برای دل مادرت لابد ! پیشنهاد میانجیگری بین دو دولت را بدهد برای ختم به خیر شدن پرونده ات. نه اینکه اینطور پشت میله ها جان بدهی و هیچ صدایی برای دفاع از تو از هیچ گوشه ای برنخیزد. آنهم در کشوری و با دولتی که بزرگترین هنرش در این سالها کشتن اهل قلم بوده است. یعنی هیچ کس نبود به تو بگویددر این طویله سر بلند کردن و به بالا نگاه کردن حرام است؟&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 21 Apr 2009 11:56:18 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>داستانی که تکرار شد.</title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-28.aspx</link>
<description>  
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;داستانی که تکرار شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;انتخابات اول ریاست جمهوری بعد از دوره طالبان را خوب به یاد دارم . حوزه هایی هم برای مهاجرین افغان که در ایران ساکن بودند دایر شده بود و مردم چه خوشبینانه به اینده ی این انتخابات دل بسته بودند.من هم سهم کوچکی داشتم در برگزاری این انتخابات شوم . در یکی از حوزه های جنوب تهران که در یک سالن ورزشی در منطقه ای پرت واقع بود به عنوان رئیس یکی از صندوق ها سهم  گرفته بودم.بااینکه از همان آغاز مشخص بود مردم به پای صندوق هایی میروند با نتایجی از قبل تعیین شده . اما تقلای صادقانه و معصومانه مردم و امیدواری هایشان برای بهتر ساختن اینده برایم عزیز و محترم بود.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;روز قبل از برگزاری انتخابات سالن را تحویل ما دادند . هشت صندوق رای گیری قرار بود که در ان سالن رای مردم را دست ناخورده ! تحویل مسئولان بدهند. مسئولان هر صندوق مشغول  درست کردن به اصطلاح حوزه ی خود شدند. تقریبا کار به اخر رسیده بود و مابرای رفتن اماده می شدیم که متوجه شدم  چند نفری مشغول چسپاندن پوستر هایی به دیوارهای سالن هستند . روی پوستر هایشان با قلم بزرگ از خواهران عزیز تقاضا کرده بودند که در ضمن برنامه ی رای گیری حجاب خود را رعایت کنند. برای من قابل تحمل نبود چنین رفتاری .هر چه بود مساله مساله ی انتخابات بود نه اصلاح مسایل عقیدتی مردم. و انگهی از نفوذ تفکر حاکم ایرانی احساس بیزاری می کردم که حتی در توالت های خود می نویسند حجاب را رعایت کنید.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خلاصه چسپاندن این پوستر ها همان و شروع شدن یک مشاجره داغ بین من و این دوستان همان . انها مدعی بودند که ما  وطنی اسلامی میخواهیم و من مدعی که حق نداریم به کسانی که می ایندتا فقط  رای بدهند درس اخلاق بدهیم.و افغانستان باید قبل از اینکه یک کشور اسلامی به این معنا که دوستان میگفتند باشد باید یک کشور آزاد باشد . &lt;FONT color=#cc0000&gt;[دریغ که وطن نه ازاد شد نه اسلامی ]&lt;/FONT&gt;خلاصه قرار شد پوسترها برداشته شود که شد .&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;فردای آن روز مردم امدند و چه بسیار هم امدند. اغلب گروه گروه با مینی بوس می امدند . سر و وضع اغلبشان طوری نشان میداد که گویی همان یک ساعت قبل از سر کوره های اجر پزی یا مزارع پنبه بلند شده اند و امده اند . صورت های سوخته و دست و پاهای پینه بسته و سر و وضع ژولیده ی شان نشاندهنده ی رنج بسیار ی بود که یقینا سالها متحمل ان بوده اند. از در سالن که وارد می شدند خانم ها به قسمت ما هدایت داده می شدند. انروز من اهریمن فقر و بی سوادی را از نزدیک لمس کردم .مخصوصا زشت ترین صورتش را که بر سرنوشت زنان مظلوم افغانستان حاکم بود. تا انروز اینهمه از نزدیک ندیده بودم و لمس نکرده بودم . با خود میگفتم چقدر غافل بودی و چقدر خودخواه که ادعا میکردی  دردت درد مردم وطنت است . به خودم میگفتم لعنت برتو که حتی یک داغ از این همه داغ که بر دست های این زنان هست بر دست های  تو نیست و تو چه اسان ادعای همدردی با انها را میکنی. &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;تقریبا همه شان بی سواد بودند و من برای کمک به انها در تیک زدن درست کنار نام کاندید منتخب شان باید پشت اتاقک رای گیری می رفتم . زهر بی اعتمادی را در حرکاتشان حس می کردم. اصلا به من اعتماد نداشتند که در کاغذشان نام کاندیدشان را بیابم .وقتی میگفتم کمکتان میکنم بیشترشان میگفتند تو کنار بایست بعد با انگشت شروع میکردند به شمردن لیست از کنار عکس ها و اگر مثلا کاندید شان شماره پانزدهم بود میگفتند این را برای ما علامت بزن. مشخص بود که حتی کاندید های خود را از چهره هایشان نمی شناختند و ان کسی را که باید انتخاب  می کردند دستوری بود که مردانشان از قبل به انها داده بودند. انهم مردانی که خدا میداند خود انها چقدر اگاهی داشتند یا نداشتند. نمی دانستم به آن حال باید خندید یا گریست.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;به هر حال روز تمام شد و رای ها زیر نظر ناظرین احزاب و گرو ه ها از مردم گرفته شد. صندوقها را جمع کردیم و تحویل دادیم تا برای شمارش به صورت دست ناخورده ! به افغانستان فرستاده شود.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;عجیب انکه حتی یک نفر از همه ی ان مردمی که برای رای گیری امده بودند سرشان را بلند کرده به دیوارها نگاهی هم نینداختند آن روز .مردم خسته تر و گرسنه تر و در هم شکسته تر از ان بودند که به سلایق سرشار از بی  دردری من برای محترم دانستن آزادی و یا آن دوستان دیگر مبنی بر رعایت حجاب و شئونات اسلامی اهمیتی بدهند.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc0000&gt; راستی ملتی که گرسنه است و ملتی که از هر لحظه از جان خود بیمناک است برایش این مزخرفات که ما مدعی اش بودیم  و هستیم چه اهمیتی میتوانست یا می تواند داشته باشد؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;حالا دوباره در آستانه ی اتنخابات شوم دیگری هستیم . با همه ی بازیها و چینش های از قبل تعیین شده دیگری که سرنوشت ما را و وطن ما را هرچه بیشتر به قهقرا خواهد کشانید و البته مردمی  که خسته تر و ویران تر از قبل هستند.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;این روزها کرزی ظاهرا روزهای  اخر به قول خودش حکومتش را میگذراند و جالب اینکه گویی  داستان مشاجره ی کوچک من و ان دوستان در ان سالن رای دهی  بر سر حجاب به شکلی وسیع تر دوباره  تکرار شده است .فرقش این است که ان روز این داستان به اشخاصی مربوط میشد که هیچ سو د و زیانی نصیبشان نمی شد در دفاع از عقایدشان و امروز همه چیز به سود ها و زیان های کلان مربوط میشود.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;رئیس جمهور طالب ما حالا بعد از همه ظلم ها و خیانت هایش مخصوصا و مشخصا در حق شیعیان افغانستان امده است و مهر تایید بر مسائل فقهی انها در باب زنان زده است.و عجب که تعدادی هم که گویا زخم ظلم طالب و کوچی و کرزی را بر گرده هایشان هیچ ندیده اند به حمایت از این عمل دست زده اند. &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;مگر نه این است که طالبی طالب دیگر را تایید کرده در این داستان ؟پس این حمایت ها و هیا هو ها چه میتواند باشد؟&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;به هرحال چیزی که روشن است این است که نیاز مردم ما نان است و امنیت . و چیزی که بازهم روشن است این است که کسانی که این قضیه را علم کرده اند از خرد و کلان کسانی هستند که از کنار همین بازی ها صاحب دنیا و دم و دستگاهش شده اند.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;و آیا اینها همه برای حفظ دین و اخرت مردم است یا برای محکم کردن جای پای دولت های بیگانه در کشور ؟هرچند توفیق در  این هم بعید به نظر می اید.  تنها فایده اش گل الوده کردن بیشتر زهرابهایی  است که در کام مردم خسته ی ما میریزد . و گرنه که همه مهره ها و اتفاقات طوری که بایدچیده شوند چیده شده اند.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;FONT color=#cc0000&gt;و باز هم شبیه ان روز کسی نیست به صورت مردم نگاه کند و بداند که برای یک گرسنه این شعارهای اعتقاداتی به اندازه سرگین گاوی اهمیت ندارد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc0000&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc0000&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 18 Apr 2009 09:35:18 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>مرگ</title>
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<description>  
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;یک شعر قدیمی را میگذارم در این پست که تاریخش مربوط میشود به سقوط بامیان در ان سالهای پر فتنه . هرچند نام این روزها را چه میتوان گذاشت که بدتر از ان سالها نباشد نمیدانم ؟! و اینکه چرا این شعر را دلم خواست در این پست بگذارم . باز هم نمیدانم .شاید از شدت بی شعری .&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;به هرحال  تحمل کنید:&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;خواهرم رخت عزا کرد به تن . مادر، مرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;سهم این دهکده ی سوخته ی پرپر،مرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;خواهرم گفت که  باران شب پیش  امروز &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;پرورش  داده  به جای گل نیلوفر ،  مرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;خواهرم گفت: نگهبان سر آسیمه ی کوه&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;این نگاهش همه غفلت،همه اش پیکرمرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;در  هجوم  تبر آلوده ی آتش  شب قبل&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;باغ را خسته رها کرد به خاکستر  ، مرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;خواهرم گفت :...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;                  پدر خنده ی تلخی زد و بعد ،&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;ریخت از شاخه ی همسایه یمان برسر مرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;حال من ماندم  و  سرمای عجیب دم صبح&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;که دوانده است  درون کفن خواهر  ، مرگ&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;بوی گیسوش هنوز از نفس دشت پر است &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;بوی پیراهنش اما  پر از &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;                                خنجر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;                                       مرگ &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt;                                                 . . .&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 11 Apr 2009 07:48:18 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>تولد</title>
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<description>  
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; روز تولد من&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;با صدای زنگ ساعت موبایلم بیدار شدم: &quot;شیرین زجوی و جر موره نموره    لب جلگه چکر موره نموره&quot;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;چشم هام را آهسته آهسته باز کردم تا دیرتر بفهمم هنوز هستم .هوا روشن بود. لحافی راکه از کابل &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;برای خودم سوغاتی اورده بودم کنار زدم. به مادرم گفته بودم برایم درست کند . گفته بودم خوابیدن زیر &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;لحاف مزه ی دیگری دارد ولی دریغ که هیچ تفاوتی ندارد تلخی خواب حتی وقتی زیر لحاف زرتار کابلی &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;باشی و مدام کابوس جنگ ببینی.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;ایمانم را صبحانه دادم و به مدرسه اش رساندم. در راه برگشت حال خوبی داشتم . مخصوصا که کارگران &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;شهرداری را دیدم که امروز به شکل عجیبی جان میکندند تا پیاده رو ها و سرک ها را پاک کنند از برف . &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;گفتم نکند که خدا ناخواسته بهار امدنی است و ما بی خبر. یک مشت نان خورد شده در جیبم گذاشته &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بودم که برای کبوتران سرگردان صبحگاهی بریزم . جلوی در خانه بدهی ام را با پرنده ها صاف کردم .&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;و امدم بالا. لباسهای بیرونم را کشیدم . یک فنجان قهوه درست کردم و ایستادم جلوی پنجره تا بیرون را &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;دقیق تر نگاه کنم بلکه نشانه هایی از امدن بهار پیدا کنم که نشد. چون در همین فاصله ی بالا امدن من &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; برفباد شدیدی شروع به بارش کرده بود . از بالا کارگران را نگاه کردم . شبیه ماشین های کوکی کار می &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;کردند . راستی که این اب و هوا و این مردم هر کدامشان به نوعی سماجت خاص خودشان را دارند. &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;همه را به حال خودشان گذاشتم و امدم به اتاق بچه هایم . رفتم توی تخت سنا و کنارش دراز کشیدم. &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بغلش کردم و موهایش را با همه وجودم بو کشیدم . هنوز بوی عجیب و دیوانه کننده ی دوران شیر &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خواری اش را دارد. به خودش کش و قوسی داد و چشمهای شادابش را در چشمهایم باز کرد و مثل هر &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;روز چند دقیقه ای دستش را دور گردنم حلقه کرد و گذاشت با گرمای تنش جان بگیرم.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بعد بلند شد و روزش را طوری که انگار این اولین تجربه اش از زندگی است شروع کرد. هر روز همینطور &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;شروع میکند و من هر روز از این تازگی و سرزندگی حیران می مانم.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بعداز صبحانه کمی موسیقی شنیدم . داستان گونه ی ناتمامی داشتم که رویش کمی کار کردم و بعد &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;کاری که نباید میشد شد. یادم امد امروز نهم اسفند هست و روز تولدم.&lt;BR&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;دیگر دست و دلم به کار نرفت. یادم امد از جند سال پیش تصمیم گرفته بودم این تولدم جور دیگری باشد &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;. مثلا حس فوق العاده تری داشته باشم یا هر چیزی دیگری در این روز باشد که برایم متفاوتش کند با &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;همه روزهای تولد دیگرم. هرچی سبک و سنگین کردم به نتیجه خاصی نرسیدم جز اینکه  فقط&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بیش تر از همیشه به این رسیدم که مادرم در به دنیا اوردن من دچار چه اشتباه مهلکی شده است . &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;امروز کاملا تنها بودم. همسرم چند روزی است که مسافرت است . ایمان مدرسه بود و برای سنا هم &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اهمیت روز تولد من تقریبا به اندازه یک خمیازه صبحگاهی بود قبل از اینکه صورتش را بشورد وسر حال &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بیاید.گفتم اینهم سی سالگی دخترکی که فکر میکرد میتواند هرقدر ستاره در اسمان هست برای &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خودش پایین بیاورد . حس خوبی نبود. سرم را لای همان لحاف زرتار کابلی پیچیدم و راستش به غیر از &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;ساعت های ضروری تمام روز را یک نفس خوابیدم . بی انکه از هیچ کس بشنوم تولدت مبارک.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;یا اینکه اصلا  هیچ میلی به شنیدن این جمله ی تکراری و دروغی و زشت در خود احساس کنم. &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Fri, 27 Feb 2009 22:51:18 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>دیدار</title>
<link>http://badhayehamvare.blogfa.com/post-24.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=5&gt;دیدار&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         نوشتم :&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         در جنگ &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         تنها انسانها حرا م نمیشوند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         گاهی گلوله ها نیز&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         قربانی خطای شلیک ها میشوند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;     &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;        نوشتم :&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         نگران نباشید&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         دلخوش تیرهایی که شاید&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         برسینه ی من ننشینند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         یک روز دیگر نیز می مانم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         تابوتم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         بیست و چهار ساعت پیش از خودم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         به دستتان خواهد رسید.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         فردا &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         بر شانه هایتان خواهم بود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         تا پای بکوبید&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         لااله الا لله بگویید &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         و مرا &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         با دستهای خود به خاک بسپارید&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;       &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         نوشتم:&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         قول مردگان هم بهای خود را دارد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         و در راه از ماشین پیاده شدم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         آه سردارم !&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         برایشان ننوشتم این دشت &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         وعده گاه سوخته ی من و توست.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         از خاک و دود تانکها و سربازها&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;          تنها&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;          باریکه راهی کافی است&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;                             تا بیابی ام.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         گفته بودی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         به دیدارت که بیایم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;        جنگ را رها خواهی کرد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         فرصتی برایم نمانده است&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         آخرین گلوله ات را &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;         در سینه ی من که بنشانی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;                   دیگر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;          هیچ حسرتی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt;          با خودبه گور نخواهم برد .&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2009 08:39:18 GMT</pubDate>
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